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किताबें (Books)…..!

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हम सभी ने कभी न कभी ये सुना होगा कि किताबें (Books) हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं. पता नहीं आप लोग इस बात पे विश्वास करते हैं या नहीं, पर मैं इस बात पर भरोसा करती हूँ. मुझे सच में लगता है के किताबें इंसान कि सबसे अच्छी दोस्त होती हैं, ना वो हमसे कभी कुछ मांगती है, ना कभी कोई वादा लेती हैं, बस हमेशा हमको ही सहारा देती हैं. मन उदास होने पे कोई दोस्त आये या न आये पर अगर अच्छी किताब मिल जाये तो कुछ देर के लिए दुःख भी भूला जा सकता है. ज़िन्दगी में दोस्त तो धोखा भी दे जाते है पर यह किताबें नहीं, आप इनकी परवाह करो या न करो, यह हमेशा आपकी परवाह करती हैं. चाहे यह आपके कमरे के किसी कोने में पड़ी रहे, जिसपे धूल लग रही हो, बरसो से आपने इन्हें छुआ भी न हो, फिर भी आप जब इन्हें अपने पास लाओगे ये तब आपको पूरा सुकून, आनंद देगी. जब दिल उदास हो और कोई अच्छी किताब पढ़ ली जाए तो होंठों पे एक मुस्कान आ जाती हैं, जब अकेलापन महसूस करो और एक अच्छी किताब पास हो तो वो अकेलापन भी दूर हो जाता है. किताब पढ़ते-पढ़ते, वक़्त कब गुज़र जाता है पता नहीं चलता. मैंने कहीं पढ़ा था कि एक अच्छी किताब आपको हँसाती है, रुलाती भी है, उसमें सारी भावनाएं होती हैं. वो सारे वक़्त आपका दिल लगाए रखती है. सच ही तो है एक किताब पढ़ने के ज़रिये हम एक नयी ज़िन्दगी को जी लेते हैं. 🙂

आपका तो पता नहीं पर मैं जब भी कोई किताब या कहानी पढ़ती हूँ तो उसको चित्रों (images or visuals) में सोचती हूँ और ऐसा मानती हूँ के ऐसा अगर मेरे साथ होता तो? या ये मेरी ही कहानी होती तो? या भविष्य में ऐसा मेरे साथ हो तो? तब क्या सोचूंगी मैं? और इन्ही सब बातों के साथ मैं ना सिर्फ उस कहानी को बल्कि उन पात्रों को भी जी लेती हूँ जो उस कहानी में होते है, मैं हँसती भी हूँ और रोती भी हूँ. मैं अब अपने कुछ काम को लेके ज़्यादा किताबें नहीं पढ़ पाती, लेकिन जितनी भी पढ़ती हूँ उन सब में खुद को ढालने कि कोशिश करती हूँ, एक अलग, काल्पनिक ज़िन्दगी जीने कि कोशिश करती हूँ. 🙂

मेरे ज़्यादा दोस्त नहीं हैं, कुछ दोस्त हैं पर ज़्यादा नहीं. और सच कहूँ तो मुझे दोस्तों कि ज़्यादा ज़रूरत पड़ती भी नहीं. मुझे अकेले रहना पसंद है, मेरी ज़िन्दगी में म्यूजिक और बुक (Music and Books) यह दो चीज़ें ऐसी हैं जिनके होते हुए मुझे कभी किसी और चीज़ कि ज़रूरत महसूस नहीं हुयी. यहाँ WordPress पे मेरे काफी friends हैं, मैं कभी चाहती हूँ तो उनसे बात कर लेती हूँ, कभी जब मैं यहाँ नहीं आती तब music और अपने काम (works) में व्यस्त (busy) रहती हूँ. और बाकी समय मैं कोई अच्छी किताब पढ़ने में निकाल देती हूँ. एक funny बात बताऊँ? मैं इन किताबों से बातें भी करती हूँ 😀 कभी मन उदास होता है, या अजीब सा लगता है तो इन किताबों में या music सुनके मैं अपने सवालों के जवाब ढूंढने कि कोशिश करती हूँ, पता नहीं जवाब मिलते हैं या नहीं पर दिल को कुछ देर के लिए सुकून मिल जाता है. 🙂 किसी और का तो मैं नहीं कह सकती पर ये किताबें मुझे बहुत प्यारी है, मैं चाहे बरसो तक इनको अपने पास रखी रहूँ, इनकी तरफ देखूँ भी नहीं लेकिन जब दोबारा इनके पास आ के इनको पढ़ती हूँ तो ये उतनी ही ख़ुशी से मुझे अपना लेती हैं. और इसीलिए मैं मानती हूँ के ये किताबें मेरी बहुत अच्छी दोस्त हैं.

मैं उम्मीद करती हूँ के इस पोस्ट (post) को पढ़ते वक़्त आप लोग ज़्यादा bore नहीं हुए होंगे. पता नहीं मैंने ये post क्यों लिखी, वो भी हिंदी (hindi) में, ये जानते हुए के मेरे बहुत सारे readers ठीक से हिंदी नहीं जानते फिर भी आज मेरा मन हुआ के मैं अपने दिल कि इस बात को अपनी मातृभाषा में ही लिखूँ  इसीलिए लिख दिया. वैसे आप लोग किताबों के बारे में क्या सोचते हैं, ज़रूरी बताइएगा. 🙂

Thank you, मेरी इस post को पढ़ने के लिए !! 🙂

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My very first Hindi Poetry!

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Its raining ❤

Hey, How’s you all? 🙂 Its raining here in my city and my internet is not working properly 😛 but except all the odds, seriously am loving this weather 🙂 well, today I’m going to share something really special, I wrote this poem/poetry when I was in 10th or 11th std, It is a hindi poetry 🙂 and it is my first everrr writing work 😀 ……I already know that I’m just so bad at writing poetry 😛 but still I just wanted to share this with all of you guys, I don’t know what type of response I will get but I really want to share this. 🙂 And yes! please feel free to share your comments, whether it is good or bad, I would love to read them. 🙂

So here i go…. 😉

बहुत अजीब बात है ये….

जब भी बारिश आती है , अनजाने से ख्वाब साथ लाती है,
कभी लगता है बदल गयी हूँ मैं, और कभी ज़िन्दगी बदली सी नज़र आती है,

इन हवाओं में एक गीत सुनाई देता है,
इन बारिश की बूंदों में बीता कल दिखाई देता है,

बिन मौसम बरसात तो बस कभी कभी आती है,
पर जब भी आती है, बहुत सी साथ यादें लाती है,

कुछ खट्टी कुछ मीठी यादों के तोहफे के साथ,
उन यादों में हम भी खो जाते है,

ढेर सारे ग़मों को भुला कर, एक बार फिर अपनी ज़िन्दगी को जी जाते है ! ❤ 🙂

So you liked it? 😛 Please tell me, I’m waiting 😉

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Happy 69th Independence Day :)

69th Independence Day
69th Independence Day

I am Proud to be an Indian. We are amongst the Largest Nation in Producing Well Known Doctors, Engineers, and Scientists in the World. Having the most Powerful Armed Forces in history of We need not need to show off we are superior to other nations but fold our hands in humility before others because we don’t believe that we are above or beneath any individual….We Are INDIANS! 🙂

On this beautiful day, I wish you all a very Happy Independence Day ❤ Help each other and the needy. Have a great year ahead and Always stay a proud Indian! 🙂

Tiranga Balloons :)
Tiranga Balloons 🙂
Thank you Google India :)
Thank you Google India 🙂

मुझे गर्व है मेरे देश पर, मेरी संस्कृति पर और मेरे देश से जुडी हर एक चीज़ पर, मुझे गर्व है एक भारतीय होने पर 🙂 आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की ढेर सारी शुभकामनायें…..जय हिन्द। ❤

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माँ…..

आज मैं पहली बार कुछ हिंदी में लिखने जा रही हूँ. मैं माफ़ी चाहती हूँ, जिन्हें हिंदी नहीं आती उनसे (Those who can’t read or understand Hindi, I apologize to them) I AM SORRY पर मुझे इसे हिंदी में ही लिखना था आज. जो मैं आज लिख रही हूँ ये मैंने कहीं पढ़ा था और ये मेरे दिल को बहुत छु गया, क्यूंकि इसका हर शब्द मुझे सही लगा. हम अक्सर हमारी माँ को कभी ये नहीं कह पाते के हम उनसे कितना प्यार करते हैं, पर दिल से हम जानते है कि उनकी जगह या उनके द्वारा बनायीं गयी किसी भी चीज़ कि जगह हमारी ज़िंदगी में हमारे दिल में कभी भी कोई नहीं ले सकता. है. हम सब जानते है, पर कभी अपनी माँ से कुछ कह नहीं पाते, ये नहीं कह पाते के माँ आप सबसे अच्छी है, आपके हाथ का खाना, आपके हाथों से बनी हर एक चीज़ बेमिसाल है, आप इस दुनिया में सबसे अच्छी है और मैं आपके बिना कुछ भी नहीं, I LOVE YOU MAA ❤ …कुछ ही दिनों में MOTHER’S DAY आ रहा है,शायद कल ही है 🙂 पर मुझे लगता है सिर्फ एक ही दिन क्यों? क्या हम हर दिन अपनी माँ कि इज़्ज़त और उन्हें प्यार करते हुए नहीं बिता सकते? उनके लिए कुछ ख़ास करते हुए नहीं बिता सकते? बस अपने हर दिन में से सिर्फ एक पल अपनी माँ को प्यार से गले लगाइये, उनके लिए हर दिन ख़ास बन जायेगा और हम सबको MOTHER’S DAY का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा. 😉 🙂 चलिए, अब मैं आप सब को वो छोटी सी कहानी दिखती हूँ जो मेरे दिल को बहुत छु गयी, हो सकता है आप सबने ये कहानी कहीं पढ़ी हो पहले, पर मुझे ये बहुत अच्छी लगी इसलिए मैं इसे अपने blog पे share कर रही हूँ . मुझे उम्मीद है आप सबको भी अच्छी लगेगी. 🙂

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” बचपन में माँ के हाथ के बने बहुत कपड़े पहने हैं। तरह-तरह की फ्रिल वाली फ़्रोक, डिजाईन डालकर बनाये गए प्यारे-प्यारे सइ स्कर्ट-टॉप। उनकी बनाई एक फ़्रोक की जेकेट तो अभी तक रखी है, मेरा वश चलता तो वो फ़्रोक भी कभी न फेंकने देती, लेकिन कपड़े की उम्र मेरी उम्र के साथ बढ़ नहीं पाई और मुझे उन कपड़ों को पीछे छोड़कर बड़ा होना पड़ा। उनके हाथ के बने कुछ स्वेटर तो आज भी पहन लेती हूँ, बाहें थोड़ी छोटी हो गई हैं लेकिन किसे फ़र्क पड़ता है बाहों से, जब स्वेटर माँ के हाथ का बना हो तो।
बचपन में जब माँ कपड़े बनाती थी तो मेरी पहली शर्त होती थी कि जो फ़्रोक मैं पहनूँगी बिलकुल वैसी ही फ़्रोक मेरी गुड़िया के लिए भी बनानी पड़ेगी और मेरी ख्वाहिश पूरी ख़ुशी से माँ पूरी भी करती थीं। मेरी गुडिया मोहल्ले की सबसे अमीर गुड़िया मानी जाती थी क्योंकि उसके पास लहंगे से लेकर फ़्रोक तक, टॉप स्कर्ट से लेकर साड़ी तक ढेरों कपड़े होते थे, जिन्हें माँ ने हमें सिलाई मशीन के बगल में बैठा कर ही सिया होता था, हाथ से चलानी वाली उस मशीन का हत्था हम ही तो घुमाते थे। बचपन में मैं माँ से कहती थी कि जब मेरी शादी होगी तब मेरा लहंगा भी आप ही सीना तो माँ हँसती, कहतीं तेरा लहंगा तो तेरा दूल्हा लाएगा और मैं रो देती कि मैं किसी और का दिया लहंगा नहीं पहनूँगी । पर अब वो लम्हे सिर्फ मीठी यादें हैं… 🙂

हम शायद अपने कल को वो मीठी यादें न दे पाएँ… क्यूंकि अब लड़कियों का सिलाई मशीन चलाना, सीखना पुराना हो चुका है. अब माएँ बच्चों के साथ बैठकर कपड़े नहीं सीतीं बल्कि टच स्क्रीन (touch screen) पर ढेरों वेबसाइट (websites) खोलकर कपड़े चुनती हैं, अब बार्बी डॉल (barbie doll) का ज़माना है, फैशन या तरक्की के नाम पे हम कहीं न कहीं अपनी ज़िंदगी कि छोटी छोटी खुशियों को भूल गए हैं. अब न माओं के पास उतना टाइम है न बच्चियों के पास, हमने तरक्की जो कर ली है… लेकिन कोई भी तरक्की माँ के हाथ के बने कपड़ों का सुख नहीं दे सकती। माँ कि वो पुरानी यादों कि जगह नहीं ले सकती. वक़्त बदल गया है, पर माँ या माँ से जुड़ा कोई भी रिश्ता कभी नहीं बदल सकता. 🙂 “

मैं नहीं जानती ये प्यारी सी कहानी किसने लिखी है, मुझे मेरी एक दोस्त ने ये forward किया था….पर जिसने भी लिखी है बहुत अच्छी लिखी है और मैं उसे THANK YOU कहना चाहती हूँ. 🙂

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