Words from the Heart

And, a dream died….!

Look at her marksheet, just 50% in Mathematics”. Her father retorted.
“And, not to forget her Science marks, 55%. She is such a disappointment.” Her mother fumed too.

“But, Dad, Didn’t you notice my English marks? I have had got 92%, the highest in all the sections”. The 9th grade girl said fearfully yet, there was hope in her voice.

“Nobody sees your literature marks. It is Mathematics and Science that make careers”. Her father broke the hope she was clinging to.
“Stop wasting your time scribbling your good for nothing thoughts and pay attention on numericals and equations”. Even her mother failed to understand her.

And, a dream died young that day. She was engineered to opt something she could never really understand or love.
The irony is, she was allowed to be a bad engineer or a bad doctor but, not a great writer!
Really, Lucky are they whose parents say :- ‘you can do what you want, we’ll always be there for you beta’ ! 🙂

Words from the Heart

A conversation between Mother & Daughter!

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“What has been the most painful moment of your life???” She asks her daughter as they sip their coffee.

She (the daughter) flashes a short smile and then replies. “Ummm, I don’t think I can categorize but there’s this one moment that flashes before my eyes.
It happened around 4 years back when my Maa had an operation. It was not too much of a major surgery but it was a great deal for me. I don’t think I ever really knew pain until I saw her moving in pain under that effect of anesthesia. It was at that moment that I realized how much I loved her and this was something I’d never want to see ever in my life. I just couldn’t handle seeing her in pain.” And then, she held her mom’s hand and said- “I love you Maa, You are everything to me!” ❤

And…they smiled and hugged each other! 🙂

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Hindi

माँ…..

आज मैं पहली बार कुछ हिंदी में लिखने जा रही हूँ. मैं माफ़ी चाहती हूँ, जिन्हें हिंदी नहीं आती उनसे (Those who can’t read or understand Hindi, I apologize to them) I AM SORRY पर मुझे इसे हिंदी में ही लिखना था आज. जो मैं आज लिख रही हूँ ये मैंने कहीं पढ़ा था और ये मेरे दिल को बहुत छु गया, क्यूंकि इसका हर शब्द मुझे सही लगा. हम अक्सर हमारी माँ को कभी ये नहीं कह पाते के हम उनसे कितना प्यार करते हैं, पर दिल से हम जानते है कि उनकी जगह या उनके द्वारा बनायीं गयी किसी भी चीज़ कि जगह हमारी ज़िंदगी में हमारे दिल में कभी भी कोई नहीं ले सकता. है. हम सब जानते है, पर कभी अपनी माँ से कुछ कह नहीं पाते, ये नहीं कह पाते के माँ आप सबसे अच्छी है, आपके हाथ का खाना, आपके हाथों से बनी हर एक चीज़ बेमिसाल है, आप इस दुनिया में सबसे अच्छी है और मैं आपके बिना कुछ भी नहीं, I LOVE YOU MAA ❤ …कुछ ही दिनों में MOTHER’S DAY आ रहा है,शायद कल ही है 🙂 पर मुझे लगता है सिर्फ एक ही दिन क्यों? क्या हम हर दिन अपनी माँ कि इज़्ज़त और उन्हें प्यार करते हुए नहीं बिता सकते? उनके लिए कुछ ख़ास करते हुए नहीं बिता सकते? बस अपने हर दिन में से सिर्फ एक पल अपनी माँ को प्यार से गले लगाइये, उनके लिए हर दिन ख़ास बन जायेगा और हम सबको MOTHER’S DAY का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा. 😉 🙂 चलिए, अब मैं आप सब को वो छोटी सी कहानी दिखती हूँ जो मेरे दिल को बहुत छु गयी, हो सकता है आप सबने ये कहानी कहीं पढ़ी हो पहले, पर मुझे ये बहुत अच्छी लगी इसलिए मैं इसे अपने blog पे share कर रही हूँ . मुझे उम्मीद है आप सबको भी अच्छी लगेगी. 🙂

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” बचपन में माँ के हाथ के बने बहुत कपड़े पहने हैं। तरह-तरह की फ्रिल वाली फ़्रोक, डिजाईन डालकर बनाये गए प्यारे-प्यारे सइ स्कर्ट-टॉप। उनकी बनाई एक फ़्रोक की जेकेट तो अभी तक रखी है, मेरा वश चलता तो वो फ़्रोक भी कभी न फेंकने देती, लेकिन कपड़े की उम्र मेरी उम्र के साथ बढ़ नहीं पाई और मुझे उन कपड़ों को पीछे छोड़कर बड़ा होना पड़ा। उनके हाथ के बने कुछ स्वेटर तो आज भी पहन लेती हूँ, बाहें थोड़ी छोटी हो गई हैं लेकिन किसे फ़र्क पड़ता है बाहों से, जब स्वेटर माँ के हाथ का बना हो तो।
बचपन में जब माँ कपड़े बनाती थी तो मेरी पहली शर्त होती थी कि जो फ़्रोक मैं पहनूँगी बिलकुल वैसी ही फ़्रोक मेरी गुड़िया के लिए भी बनानी पड़ेगी और मेरी ख्वाहिश पूरी ख़ुशी से माँ पूरी भी करती थीं। मेरी गुडिया मोहल्ले की सबसे अमीर गुड़िया मानी जाती थी क्योंकि उसके पास लहंगे से लेकर फ़्रोक तक, टॉप स्कर्ट से लेकर साड़ी तक ढेरों कपड़े होते थे, जिन्हें माँ ने हमें सिलाई मशीन के बगल में बैठा कर ही सिया होता था, हाथ से चलानी वाली उस मशीन का हत्था हम ही तो घुमाते थे। बचपन में मैं माँ से कहती थी कि जब मेरी शादी होगी तब मेरा लहंगा भी आप ही सीना तो माँ हँसती, कहतीं तेरा लहंगा तो तेरा दूल्हा लाएगा और मैं रो देती कि मैं किसी और का दिया लहंगा नहीं पहनूँगी । पर अब वो लम्हे सिर्फ मीठी यादें हैं… 🙂

हम शायद अपने कल को वो मीठी यादें न दे पाएँ… क्यूंकि अब लड़कियों का सिलाई मशीन चलाना, सीखना पुराना हो चुका है. अब माएँ बच्चों के साथ बैठकर कपड़े नहीं सीतीं बल्कि टच स्क्रीन (touch screen) पर ढेरों वेबसाइट (websites) खोलकर कपड़े चुनती हैं, अब बार्बी डॉल (barbie doll) का ज़माना है, फैशन या तरक्की के नाम पे हम कहीं न कहीं अपनी ज़िंदगी कि छोटी छोटी खुशियों को भूल गए हैं. अब न माओं के पास उतना टाइम है न बच्चियों के पास, हमने तरक्की जो कर ली है… लेकिन कोई भी तरक्की माँ के हाथ के बने कपड़ों का सुख नहीं दे सकती। माँ कि वो पुरानी यादों कि जगह नहीं ले सकती. वक़्त बदल गया है, पर माँ या माँ से जुड़ा कोई भी रिश्ता कभी नहीं बदल सकता. 🙂 “

मैं नहीं जानती ये प्यारी सी कहानी किसने लिखी है, मुझे मेरी एक दोस्त ने ये forward किया था….पर जिसने भी लिखी है बहुत अच्छी लिखी है और मैं उसे THANK YOU कहना चाहती हूँ. 🙂

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